अष्टछाप कवि : गोविन्दस्वामी, - Study Search Point

निरंतर कर्म और प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं।

अष्टछाप कवि : गोविन्दस्वामी,

Share This
गोविन्दस्वामी वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) के आठ कवियों (अष्टछाप कवि) में एक थे। इनका जन्म राजस्थान के भरतपुर राज्य के अन्तर्गत आँतरी गाँव में 1505 ई० में हुआ था। ये सनाढ्य ब्राह्मण थे, ये विरक्त हो गये थे और महावन में आकर रहने लगे थे।1585 ई० में इन्होंने गोस्वामी विट्ठलनाथ से विधिवत पुष्टमार्ग की दीक्षा ग्रहण की और अष्टछाप में सम्मिलित हो गए।
इन्होंने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का अपने पदों में वर्णन किया! गोविन्दस्वामी अंतरी के रहने वाले सनाढ्य ब्राह्मण थे जो विरक्त की भाँति आकर महावन में रहने लगे थे। बाद में गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के शिष्य हुए जिन्होंने इनके रचे पदों से प्रसन्न होकर इन्हें अष्टछाप में लिया। गोविन्दस्वामी अंतरी के रहने वाले सनाढ्य ब्राह्मण थे जो विरक्त की भाँति आकर महावन में रहने लगे थे। बाद में गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के शिष्य हुए जिन्होंने इनके रचे पदों से प्रसन्न होकर इन्हें अष्टछाप में लिया।
ये गोवर्धन पर्वत पर रहते थे और उसके पास ही इन्होंने कदंबों का एक अच्छा उपवन लगाया था जो अब तक ‘गोविन्दस्वामी की कदंबखडी’ कहलाता है।
इनका रचनाकाल सन् 1543 और 1568 ई. के आसपास माना जा सकता है। वे कवि होने के अतिरिक्त बड़े पक्के गवैये थे।तानसेन कभी-कभी इनका गाना सुनने के लिए आया करते थे। ये गोवर्धन पर्वत पर रहते थे और उसके पास ही इन्होंने कदंबों का एक अच्छा उपवन लगाया था जो अब तक ‘गोविन्दस्वामी की कदंबखडी’ कहलाता है। इनका रचनाकाल सन् 1543 और 1568 ई. के आसपास माना जा सकता है वे कवि होने के अतिरिक्त बड़े पक्के गवैये थे। तानसेन कभी-कभी इनका गाना सुनने के लिए आया करते थे।

Govindaswami
Govindaswami Vallabha sect (Pustimarg) eight poets (Ashtchhap poet) were in. His birth under Rajasthan's Bharatpur Aantri village was in 1505 AD 0. These Snady Brahmin, they became estranged and have lived in Mhown were duly Pushtmarg from 0.1585 E 0 Vittlnath Goswami, he took initiation and joined Ashtchhap.
He's different pastimes of Lord Krishna describes your posts! Govindaswami Interior Snady Brahmins who were living like a recluse living in Mhown were coming. Vittlnath GK Goswami, who later became the disciples created these positions jauntily Ashtchhap took them. Govindaswami Interior Snady Brahmins who were living like a recluse living in Mhown were coming. Vittlnath GK Goswami, who later became the disciples created these positions jauntily Ashtchhap took them.
They lived at Govardhana Hill and a nice park nearby Kdnbon he had planted until now "Kdnbkdi of Govindaswami is called.
These Rcnakal 1543 in and 1568. E. around can be considered. In addition to being the largest concrete poet singers Thektansen Sometimes they used to come to hear the song. They lived at Govardhana Hill and a nice park nearby Kdnbon he had planted until now "Kdnbkdi of Govindaswami is called. These Rcnakal 1543 in and 1568. E. can be dated to the poet in addition to being great singers were confirmed. Tansen Sometimes they used to come to hear the song.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Pages