इतिहास किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु के साथ जुड़े हुए अतीत की घटनाओं की पूरी श्रृंखला है| भारतीय इतिहास के अंतर्गत भारतीय उपमहाद्वीप के प्रागैतिहासिक बस्तियों और समाज के अलावा भारतीय सभ्यता की उन्नति, विभिन्न भारतीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मिश्रण एवं धार्मिक विचारधाराओं के विकास को शामिल किया गया है|
युग संक्षिप्त विवरण : -
विक्रम संवत (56 ई.पू.) - इसकी शुरूआत उज्जैन के शासक राजा विक्रमादित्य नेशकों पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में की थी|
शक संवत (78 ई.) - इसकी शुरूआत शक राजा द्वारा विक्रमादित्य के शासनके 137 वर्ष बाद उज्जैन पर पुनः विजय प्राप्त करने केउपलक्ष्य में की गई थी|
गुप्त संवत (320 ई.) - इसकी शुरूआत चन्द्रगुप्त I ने की थी|
हर्ष संवत (606 ई.) - इसकी शुरूआत कन्नौज के शासक हर्षवर्धन ने की थीऔर हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद एक सदी तक यह उत्तरभारत में लोकप्रिय था|
कलचुरी संवत (248 ई.) - इसकी शुरूआत त्रिकूटक नामक एक छोटे राजवंश द्वाराकी गई थी|
बंगाल का लक्ष्मण संवत (1119 ई.) - कुछ सूत्रों से पता चलता है कि राजा लक्ष्मण द्वारा इसकीशुरूआत की गई थी|
कलियुग की शुरूआत (3102 ई.पू.) - इसका प्रयोग धार्मिक तिथियों के लिए इस्तेमाल किया गयाथा और शायद ही कभी राजनीतिक घटनाओं के लिएकिया जाता है|
बौद्ध काल (544 ई.पू.) - इसका प्रयोग सीलोन में अक्सर धार्मिक कार्यों के लिएकिया जाता था लेकिन इसकी शुरूआत की तिथि के बारेमें सटीक जानकारी नहीं है|
महावीर काल (528 ई.पू.) - जैन सम्प्रदाय के लोग धार्मिक कार्यों के लिए इसका प्रयोगकरते थे|
सप्तर्षि या लौकिक काल - इसका प्रयोग मध्यकाल में कश्मीर क्षेत्र में किया जाता था|
नेपाल का नेवर काल (878 ई.) - इसका प्रयोग नेपाल में किया जाता है|
केरल का कोल्लम संवत (825 ई.) - इसका प्रयोग केरल में किया जाता था|
चालुक्य शासक विक्रमादित्य VI का काल (1075 ई.) - इसका प्रयोग पूर्व मध्यकाल में किया जाता था|
प्राचीन भारतीय इतिहास का कालक्रम : काल समयावधि -
पुरापाषाण काल - 10000 ई.पू. तक
मध्यपाषाण काल - 10000 से 4000 ई.पू
नवपाषाण काल - 5000 से 1800 ई.पू.
ताम्रपाषाण काल - 1800 से 1000 ई.पू.
लौह युग - शुरूआत 1000 ई.पू. में
सिंधु घाटी सभ्यता - 2900 से 1700 ई.पू.
वैदिक काल - 1500 से 600 ई.पू.
पूर्व-मौर्य काल - छठी शताब्दी से चौथी शताब्दी ई.पू.
मौर्य काल - 321 से 184 ई.पू.
मौर्योत्तर काल - 200 ई.पू. से 300 ई.
गुप्त काल - चौथी शताब्दी से छठी शताब्दी ई.
हर्ष युग - 606 से 647 ई.
बादामी के चालुक्य - 543 से 755 ई.
काँचीपुरम के पल्लव - 560 से 903 ई.
साभार - जोश,
युग संक्षिप्त विवरण : -
विक्रम संवत (56 ई.पू.) - इसकी शुरूआत उज्जैन के शासक राजा विक्रमादित्य नेशकों पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में की थी|
शक संवत (78 ई.) - इसकी शुरूआत शक राजा द्वारा विक्रमादित्य के शासनके 137 वर्ष बाद उज्जैन पर पुनः विजय प्राप्त करने केउपलक्ष्य में की गई थी|

हर्ष संवत (606 ई.) - इसकी शुरूआत कन्नौज के शासक हर्षवर्धन ने की थीऔर हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद एक सदी तक यह उत्तरभारत में लोकप्रिय था|
कलचुरी संवत (248 ई.) - इसकी शुरूआत त्रिकूटक नामक एक छोटे राजवंश द्वाराकी गई थी|
बंगाल का लक्ष्मण संवत (1119 ई.) - कुछ सूत्रों से पता चलता है कि राजा लक्ष्मण द्वारा इसकीशुरूआत की गई थी|
कलियुग की शुरूआत (3102 ई.पू.) - इसका प्रयोग धार्मिक तिथियों के लिए इस्तेमाल किया गयाथा और शायद ही कभी राजनीतिक घटनाओं के लिएकिया जाता है|
बौद्ध काल (544 ई.पू.) - इसका प्रयोग सीलोन में अक्सर धार्मिक कार्यों के लिएकिया जाता था लेकिन इसकी शुरूआत की तिथि के बारेमें सटीक जानकारी नहीं है|
महावीर काल (528 ई.पू.) - जैन सम्प्रदाय के लोग धार्मिक कार्यों के लिए इसका प्रयोगकरते थे|
सप्तर्षि या लौकिक काल - इसका प्रयोग मध्यकाल में कश्मीर क्षेत्र में किया जाता था|
नेपाल का नेवर काल (878 ई.) - इसका प्रयोग नेपाल में किया जाता है|
केरल का कोल्लम संवत (825 ई.) - इसका प्रयोग केरल में किया जाता था|
चालुक्य शासक विक्रमादित्य VI का काल (1075 ई.) - इसका प्रयोग पूर्व मध्यकाल में किया जाता था|
प्राचीन भारतीय इतिहास का कालक्रम : काल समयावधि -
पुरापाषाण काल - 10000 ई.पू. तक
मध्यपाषाण काल - 10000 से 4000 ई.पू
नवपाषाण काल - 5000 से 1800 ई.पू.
ताम्रपाषाण काल - 1800 से 1000 ई.पू.
लौह युग - शुरूआत 1000 ई.पू. में
सिंधु घाटी सभ्यता - 2900 से 1700 ई.पू.
वैदिक काल - 1500 से 600 ई.पू.
पूर्व-मौर्य काल - छठी शताब्दी से चौथी शताब्दी ई.पू.
मौर्य काल - 321 से 184 ई.पू.
मौर्योत्तर काल - 200 ई.पू. से 300 ई.
गुप्त काल - चौथी शताब्दी से छठी शताब्दी ई.
हर्ष युग - 606 से 647 ई.
बादामी के चालुक्य - 543 से 755 ई.
काँचीपुरम के पल्लव - 560 से 903 ई.
साभार - जोश,
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